विश्व भर में सुगंध नगरी के नाम से कन्नौज को जाना जाता है लेकिन कन्नौज की गोद में इतिहास की भी निर्मल धारा बह रही है यहां पर आदिकाल के अति प्राचीन मंदिर बड़ी संख्या में ऐसा ही एक खास मंदिर श्री राधा कृष्ण खाटू श्याम मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है बताया जाता है करीब 120 साल से ज्यादा यह प्राचीन मंदिर है लेकिन इस मंदिर को पूर्ण मंदिर स्वरूप कुछ सालों पहले ही मिला है दीपावली के बाद पढ़ने वाली देवउठानी एकादशी के दिन यहां पर बहुत दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने को लाखों की संख्या में आते हैं भगवान का चरण अमृत भक्तों के लिए अमृत का काम करता है सच्चे मन से मांगी हुई हर मनोकामना यहां पर पूरी होती है ऐसा भी माना गया है एक समय जब पूरे भारतवर्ष में मंदिरों को तोड़ा गया था तब यह मंदिर बड़े ही गुपचुप तरीके से बचाया गया था इसमें अति प्राचीन राधा कृष्ण की प्रतिमाएं थी।
निबंध कन्नौज शहर के बीचो-बीच श्याम नगर तलैया चौकी के पास बना हुआ है यह मंदिर श्री राधा कृष्ण खाटू श्याम मंदिर के नाम से जाना जाता है मंदिर में प्रभु खाटू श्याम राधा कृष्ण और भगवान शिव की मनमोहक प्रतिमाएं हैं प्रतिदिन मंदिर में सैकड़ो हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं तो वहीं देव उठानी एकादशी के दिन श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में तब्दील हो जाती है।
क्या है कहानी
मंदिर अति प्राचीन बताया जाता है मंदिर के मुख्य पुजारी संदीप कुमार बताते हैं कि उनके पिता अरविंद कुमार और उनके बाबा प्रहलाद नारायण के द्वारा इस मंदिर जो की पूरी तरह से टूटा हुआ मिला था उसको समझाया गया है यह मंदिर 120 सालों से भी ज्यादा पुराना है यहां पर भगवान राधा कृष्ण की प्रतिमाएं होती थी वही यहां के लोगों की माने तो मैं बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब कन्नौज पर कुछ ऐसे लोगों ने हमला किया था जो कि मंदिरों को तोड़ते थे तब यहां के लोगों ने कुछ ऐसे प्राचीन मंदिरों को बचा लिया था जो कि उनके लिए उनकी जान से भी बढ़कर थे उन्हें में से यह एक अति प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर था जो आज श्री राधा कृष्ण खाटू श्याम मंदिर के नाम से जाना जाता है।
लोकल 18 से बात करते हुए स्थानीय भक्त बताते है कि यह मंदिर सैकड़ो साल पुराना है लेकिन अभी कुछ वर्षों पूरी यह पूरी तरह से बंद कर तैयार हो पाया है इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से खाटू श्याम के दर्शन करने जाता है तो हर के सहारे खाटू श्याम उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं हमने जो अपने पूर्वजों से इसके बारे में जाना तो उन्होंने बताया कि यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है और कुछ ऐसी ताकतों द्वारा इस मंदिर को भी तोड़ने का प्रयास किया गया था जिसको मंदिर के बनाने वाले उनके लोगों ने बचाया इसके बाद कन्नौज के ही कुछ लोगों ने इस मंदिर का सम्पूर्ण कराया आज इस मंदिर के बन जाने से क्षेत्र में बहुत सारे रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं सभी लोग यहां पर शाम के वक्त जाने से डरते थे आज यहां पर लोगों की अच्छी खासी चहल-पहल देखी जाती है छोटी-छोटी दुकान रख कर लो अपना व्यापार भी यहां पर कर रहे हैं।
मंदिर सेवक पिंकू बताते हैं कि उनके पर बाबा से पहले के समय का यह मंदिर है यहां पर भक्त बहुत दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या पर दर्शन करते हैं लेकिन एकादशी के दिन यह संख्या लाखों में तब्दील हो जाती है बाबा के चरणों में सबसे ज्यादा चमत्कार रहता है जो श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा के चरण अमित को ग्रहण करता है बाबा उसकी सभी समस्याओं को हरण कर लेते हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी संदीप कुमार बताते हैं की मंदिर तो बहुत पुराना है हम लोग शुरुआत से ही यहां पर सेवादार का काम कर रहे हैं एकादशी के दिन कन्नौज सहित आसपास के कई जिलों के लोग यहां पर दर्शन करने आते हैं इस मंदिर में बिना किसी दक्षिण के ही पूजा पाठ की जाती है जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां पर अपने अरदास लगता है उसकी हर दास यहां पर पूरी होती है।