आज़म खान को सुप्रीम कोर्ट से झटका,
रामपुर पब्लिक स्कूल भवन पर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सपा सरकार में क़द्दावर मंत्री रहे मोहम्मद आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से जोरदार झटका लगा है। आजम खान द्वारा चलाए जा रहे रामपुर पब्लिक स्कूल जोकि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा लीज पर दिए गए मौलाना मोहम्मद अली जौहर शोध संस्थान के सरकारी भवन में चलाया जा रहा था और प्रदेश में हुए सत्ता पलट के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार की कैबिनेट मीटिंग में हुए फैसला द्वारा इस लीज़ को रद्द कर दिया गया था।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट के इस फैसले के विरुद्ध आज़म खान पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की लेकिन उसका फैसला भी आजम खान के पक्ष में नहीं हुआ। तब इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध आजम खान पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अब सुप्रीम कोर्ट से भी निराशा हाथ लगी।
इस मामले के शिकायतकर्ता रामपुर के नगर विधायक व भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने बताया,
2019 में इसकी शिकायत की गई थी यह मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के नाम से पूरी बिल्डिंग थी आजम ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहते हुए इस पूरी बिल्डिंग को पहले अपने नाम कराया और फिर सरकारी बिल्डिंग में और सरकार के ही इन्वेस्टमेंट करके पूरी बिल्डिंग को खड़ा किया गया था। तत्कालीन डीएम श्री अनंजनेय जी की रिपोर्ट के आधार पर मई 2023 में उसकी लीज़ को कैबिनेट के द्वारा कैंसिल किया गया। इसके बाद इस आर्डर के अगेंस्ट आजम हाई कोर्ट गए और हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में जो कैबिनेट का जो फैसला था उसे सही ठहराते हुए इनकी याचिका को खारिज किया। इसके बाद इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर की और इसमें इन्होंने मांग की कि हाई कोर्ट के फैसले को स्टे किया जाए लेकिन आज के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में उनकी याचिका को खारिज किया गया और खारिज करने के साथ-साथ स्पष्ट रूप से इसमें टिप्पणी की गई है कि आजम ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहते हुए उसी विभाग की जमीन को स्वयं के नाम लीज़ किया और उसको व्यक्तिगत काम के लिए लगाया। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और अब यह चाहते हैं कि जो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है उसी फैसले के आधार पर अब इस बिल्डिंग को सरकार में निहित किया जाए और इसमें जैसे सरकारी काम होते हैं अगर ऑफिस होना हो तो ऑफिस ट्रांसफर किए जाएं और भी जो प्रक्रिया होती हैं उसको शुरू किया जाए।
यह पूछे जाने पर की इस जगह पर जौहर शोध संस्थान था वहां स्कूल भी संचालित हुआ करता था? इस पर आकाश सक्सेना ने बताया,, आजम का जो रामपुर पब्लिक स्कूल था वो इन्होंने पुन शिफ्ट किया था और ऑर्डर के बाद स्कूल को खाली कराया जा चुका था लेकिन सबसे बड़ी बात यह है सरकारी संपत्ति सरकारी पैसे से बनी हुई पूरी बिल्डिंग आजम ने सारे नियमों को ताक में रखते हुए यह अपने व्यक्तिगत काम के लिए ली थी और आज सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है उसके आधार पर अब यह सरकार में निहित हो गई है।
यह पूछे जाने पर की यह टोटल कितनी जगह होगी? इस पर आकाश सक्सेना ने बताया,, लगभग अगर हम माने तो बिल्डिंग का एरिया ही लगभग 15 हजार स्क्वायर फीट के आसपास होगा और इसमें काफी बड़े हिस्से में और भी चीजे हैं जो डिटेल ऑर्डर में आपको मिल जाएगी। यह शिकायत 2019 की थी जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं हमने हमेशा कोर्ट के फैसले का सम्मान किया है और आज भी जो फैसला है वह अपने आप में बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी सरकारी संपत्ति पर कोई भी इस तरह से कब्जा नहीं कर सकता जो फैसला हुआ है बिल्कुल सही हुआ है।
यह पूछे जाने पर की जो स्कूल चल रहा था जो जौहर शोध संस्थान चल रहा था वो जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित था इस पर आकाश सक्सेना ने बताया,, मैंने आपको बताया आजम ने सबसे पहले मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रेनिंग सेंटर के नाम से पहले लीज कराई उसके बाद अपना रामपुर पब्लिक स्कूल कराया तो यह सब चीजे बड़ी स्पष्ट है की किस तरह से कागजों का खेल करके और अपनी ताकत का दुरुपयोग करके इस तरह के कार्यों को उन्होंने किया।
