असर्फी हॉस्पिटल में महिला को बनाया बंधक
बलिया के तिखमपुर स्थित असर्फी हॉस्पिटल से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पहुंच गए। कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
एक तरफ गर्मी का मौसम जहां लोग परेशान है। सरकार द्वारा आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए सुविधा दी जाती है। लेकिन बलिया के असर्फी हॉस्पिटल में इलाज कराने आई महिला की जरा गौर से सुनिए। दरअसल इस महिला का इलाज और इसके बगल की सासु मां हैं जिनका इलाज उक्त हॉस्पिटल में चला। इस महिला का आज यानी गुरुवार को यहां से डिस्चार्ज कर दिया गया। बगल की सासू मां को कल बुधवार को ही छोड़ा गया था। आयुष्मान कार्ड पर सासू मां का इलाज शुरू हुआ।लेकिन रजिस्ट्रेशन मान्य नहीं हुआ। महिला की माने तो बगल की सासू मां का 4881 रूपया खर्च बताया गया।मैं दे रही थी,चूंकि सासू मां कल ही चली गईं। मैं रकम दे रही थी,यहां बताया गया कि जांच का अलग से लगेगा। मुझे चार घंटा से रोका गया है। मतलब बंधक बनाया गया है। महिला की जुबानी सुनिए।
असर्फी हॉस्पिटल के ऑपरेशन मैनेजर की माधव राव की सुनिए। इनका कहना है कि बंधक नहीं बनाया। बंधक का अर्थ क्या होता शायद इन्हें नहीं पता है। माधव जी की माने तो इंदु,मंजू भर्ती थीं। मंजू देवी कैस लेस थीं,इंदु का भी इलाज आयुष्मान से ही हुआ,किंतु उनका रिजेक्ट हो गया। मंजू का आज डिस्चार्ज था। जो पैसा अधिक था उसी की मांग कर रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकार जांच में पहुंचे। बंधक शब्द नहीं मान रहे,लेकिन संकेत जरूर कर रहे हैं। जांच कर कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
सरकार द्वारा आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज आसानी से जरूर हो रहा है।लेकिन निजी अस्पतालों में सही ढंग से जांच किया जाए,तो बहुत कुछ जानकारी मिल जायेगी। सूत्रों की माने तो आयुष्मान कार्ड पर इलाज के बाद ,बिल से ज्यादा भुगतान ले लिया जाता है।
