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गन्ने के मूल्य पर राकेश टिकैत का बड़ा बयान

गन्ने पर राकेश टिकैत का बयान



 उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार गन्ने के दाम न बढ़ने का निर्णय लिया है। जिसके चलते पिछले साल के दम ही इस बार भी गन्ना किसानों को मिलेंगे। जिस पर राकेश टिकैत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि गन्ने के दाम सरकार के द्वारा ना बढ़ाए जाना दुःखद घटना है जो भाव अक्टूबर में बढ़ना था उस भाव को यह फरवरी में बढ़ाने को कह रहे थे और अब कह रहे हैं कि हम भाव नहीं बढ़ाएंगे।


राकेश टिकैत ने कहा कि जो एलाइंस पार्टी हैं जो लोग गांव से चुनकर जाते हैं उनको हाउस में आवाज उठानी चाहिए और अपनी बात वहां पर रखनी चाहिए कि किसानों की क्या-क्या समस्या है।


राकेश टिकैत की माने तो यह दुखद घटना है और तानाशाह सरकार का यह जो रवैया है की जो भाव बढ़ना था गन्ने का वह नहीं बढ़ा लोग डिमांड करते रहे किसान और जिस भाव को अक्टूबर में बढ़ना था उस भाव को ये फरवरी में कह रहे हैं कि हम नहीं बढ़ाएंगे जो भी एलाइंस पार्टी है इनकी या जो लोग भी गांव से चुनकर जाते हैं उनको आवाज उठानी चाहिए हाउस में अपनी बात वहाँ पर रखनी चाहिए किसानो की क्या-क्या समस्याएं हैं वह रखनी चाहिए लेकिन आज किसान के मुद्दे पर बहस खत्म हो गई आंदोलन भी कम हो गए पहले किसानों के आंदोलन चलते थे गन्ने के भाव पर लेकिन कुछ किसान संगठनों ने गन्ने को कोर्ट में ले जाकर उनका बहुत नुकसान किया उसको मूवमेंट से हटा दिया बहुत सरकारी संगठन आज देश में बन गए जिससे इस तरह की दिक्कतें आई देखो उम्मीद यह थी सरकार से की गन्ने का रेट 400 रुपये से ऊपर चला जाएगा यह उम्मीद सरकार से लगा रहे थे और इन्होंने कहा भी था कि 400 से ऊपर गन्ने का भाव जाएगा हम अपनी मीटिंग के कर रहे हैं गन्ना क्षेत्र में मीटिंग है शाहजहांपुर पीलीभीत में भी है उधर अंबेडकर नगर कुछ दो-दो तिलहन और दलहन के क्षेत्र हैं उसमें भी हमारी मीटिंगे  हैं हमने निर्णय लिया है कि हम जनता के बीच में जाएंगे अपनी मीटिंग करेंगे संगठनों से को मजबूत करेंगे यह हमने निर्णय लिया और सरकार को भी चिट्ठी और मीटिंग के माध्यम से हम बताते रहेंगे आगे आंदोलन तो देश में होंगे यह देश आंदोलन से बचेगा यह देश पॉलीटिकल सिस्टम से बचेगा ही नहीं और सभी लोग एकजुट होकर और सरकार क्या कर रही है उसको ध्यान में जरूर रखें उम्मीद यह थी कि बजट में कुछ ना कुछ एग्रीकल्चर पर करें और कुछ गन्ने पर भी राहत दे दें कुछ आलू पर भी राहत दे दे और कुछ जो दूसरी फैसले हैं हमारी उन पर भी राहत दें लेकिन गन्ने का बिल्कुल स्पष्ट यह कह दिया कि भाव बढ़ेगा ही नहीं तो क्या किसान सरकार के रहमों करम पर ही जिंदा है किसानों से भी अपील है कि भाई कुछ दवाइयां और यह फर्टिलाइजर ज्यादा इस्तेमाल करते हैं इसका थोड़ा कम इस्तेमाल करें कोई आपकी जिम्मेदारी थोड़ा ही है कि हम पैदावार करके देंगे और फिर गन्ने की लाइन में लगे रहेंगे फसलों को बेचने में भाव मिलेगा नहीं कम पैदावार होगी तो ठीक भाव मिलेगा इस थ्योरी पर भी किसान को काम करना चाहिए।



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