झांसी मैं ग्राम वासियों के ऊपर वन विभाग द्वारा बनाया जा रहा है पलायन करने का दबाव, सरकार द्वारा दिए गए आवास एवं शौचालय भी तोड़ दिए गए, गांव तक जाने वाली सड़क पर खोद दी गई अनेकों मौत की खाई
परेशान अनेकों ग्रामों के ग्राम वासियों ने एकत्र होकर लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया
मामला जिला झांसी के तहसील मोंठ अंतर्गत आने वाले ग्राम परेक्षा का है जहां के ग्रामीणों ने बताया कि 1983 में बाढ़ आने की वजह से तत्कालीन जिलाधिकारी झांसी द्वारा उनको वन विभाग की जमीन पर रहने के लिए जगह दी गई थी तब से लेकर अब तक गांव वासियों ने पाई पाई जोड़कर अपने आशियाने बना लिए सरकारी योजना अंतर्गत गांव में सड़क भी डाली गई ,विद्युतीकरण भी हो गया ,पेयजल की भी व्यवस्था हो गयी ,सरकार द्वारा दिए गए आवास एवं शौचालय भी बन गए मुख्य मार्ग से गांव तक अच्छा खासा लिंक रोड भी बनाया गया हंसी खुशी से पूरा गांव जीवन यापन कर रहा था तभी अचानक उनकी जिंदगी में कुछ दिन पहले ग्रहण बनकर कुछ वन विभाग के लालची कर्मचारी आये औऱ गरीब ग्राम वासियों के निर्माणाधीन सरकारी आवास तोड़कर तहस-नहस कर दिए और ग्रामीणों से जमीन खाली करने का फरमान सुना डाला ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आवास बनाने की एवज में उनसे पैसों की मांग की जा रही है।
ग्राम वासियों ने आपस में चंदा कर झाँसी पहुचकर जिले के आला अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से शिकायत की परंतु कोई ठोस कार्यवाही न होने से वन विभाग के कर्मचारियों के हौसले बढ़ गए और उन्होंने मुख्य मार्ग से गांव तक आने वाले संपर्क मार्ग पर कई जगह बड़ी-बड़ी और गहरी गहरी खाई खोद डाली जिसकी वजह से परेक्षा,सिलारी गनेशपुरा, ख़िदरपुरा के ग्राम वासियों को आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं खाई इतनी गहरी गहरी है कि अगर एक बार व्यक्ति उसमें गिर जाए तो उसका बचना मुश्किल है
सड़क पर गहरी गहरी खाई होने की वजह से गांव में आने वाली स्कूल बसें भी बंद हो गई है जिससे ग्रामीणों के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं
जहां एक और सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए करोडो रुपए खर्च कर रही है वही चंद लोगों की वजह से बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है सरकार द्वारा गरीबों को आवास एवं इज्जत घर (शौचालय ) मुहैया कराकर उनकी जिंदगी में खुशियां बांटी जा रही हैं वहीं कुछ लालची कर्मचारियों की वजह से गरीबों की जिंदगी में पलायन का खतरा मंडरा रहा है।
