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डॉ अयूब ने चार्जशीट को दी चुनौती, जानिये क्या है मामला


पीस पार्टी के  अयूब ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने में देरी पर केस की वैधता को दी चुनौती 

कोर्ट ने मांगी जिला जज संत कबीर नगर से रिपोर्ट

चार्जशीट बार बार कोर्ट से वापस लेने को गंभीरता से लिया



इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भीम पार्टी के नेता चंद्रशेखर रावण और पीस पार्टी के  डॉक्टर अयूब के खिलाफ दाखिल चार्जशीट   कोर्ट से बार-बार वापिस करने को गंभीरता से लिया है और   जिला जज संत कबीर नगर से  रिपोर्ट मांगी है। कहा है  किन परिस्थितियों में  कोर्ट क्लर्क ने चार्जसीट स्वीकार नहीं की और वापस कर दी है 

यह आदेश जस्टिस संजय कुमार सिंह ने दिया है। 

याचिका में  डॉक्टर अयूब ने सीजेएम संत कबीर नगर की अदालत में चल रहे  केस में संज्ञान विलंब से लिए जाने को चुनौती दी है।  याची के अधिवक्ता का कहना था कि डॉक्टर अयूब और चंद्रशेखर रावण के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 171 एच और 188 के अलावा आपदा अधिनियम और महामारी अधिनियम के तहत 21 फरवरी 2022 को मुकदमा दर्ज किया था। जिसमें पुलिस ने 9 अगस्त 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया ।जिस पर कोर्ट ने 10 अगस्त 2023 को संज्ञान लिया । 

अधिवक्ता का कहना है कि अदालत ने चार्जसीट दाखिल होने के लगभग एक साल बाद संज्ञान लिया जबकि नियमानुसार 6 माह के भीतर चार्ज सीट पर संज्ञान ले लिया जाना चाहिए। ऐसे में सीजेएम द्वारा लिया गया संज्ञान सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुसार मियाद से बाधित है। 

राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता विकास सहाय ने  कहा कि जांच अधिकारी ने विवेचना समय से पूरी कर चार्ज सीट कोर्ट में दाखिल करने का प्रयास किया था , हर बार सीजेएम  संत कबीर नगर के क्लर्क ने कोई न कोई कारण बता कर  लेने से इंकार कर दिया। एस एस पी ने जिला जज को पत्र लिखकर इस बारे में अवगत कराया था। 

इस पर कोर्ट ने जिला जज संत कबीर नगर को जनवरी 23 से 3 अगस्त 23 तक की मॉनिटरिंग रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।  तथा यह भी पूछा है कि एसपी के पत्र पर उनके द्वारा क्या कार्रवाई की गई और क्या कारण था कि क्लर्क द्वारा रिपोर्ट वापस  की जा रही थी।

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