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समरसता संगोष्ठी में राष्ट्र आराधना पर हुई चर्चा



 कम्पनी बाग स्थित एक मैरिज हाल में सामाजिक समरसता गतिविधि बस्ती, गोरक्ष प्रान्त के तत्वावधान में  समरसता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय था "समरसता से राष्ट्र आराधन" कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवा निवृत्त अवर अभियंता दीनानाथ प्रसाद जी ने किया।

संचालन जिला प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र ने किया। प्रेरक अमृत वचन और समरसता गीत से समरस वातावरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त प्रचारक आदरणीय रमेश जी ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माता डा0 भीमराव अम्बेडकर जी का पूरा नाम डा0 राम जी राम भीमराव अम्बेडकर था, जैसा कि हम जानते हैं महाराष्ट्र में बेटे के नाम से पहले पिता का नाम जुड़ा रहता है राम जी राम पिता का नाम था तथा अम्बेडकर नाम गुरु जी से प्राप्त हुआ था। डाक्टर अम्बेडकर जी का जन्म एक सनातनी धार्मिक परिवार में हुआ था।यह बात डाक्टर अम्बेडकर जी की पुस्तक में उद्धृत है।डा0 अम्बेडकर जी के नाम से पिता जी का नाम राम जी राम राव हटा  देना एक राजनैतिक षंणयंत्र था।

श्रीमान रमेश जी ने कहा कि केवट और शबरी से राम न मिले होते तो शायद राम को लोग मर्यादा पुरुषोत्तम न मानते ठीक उसी प्रकार से अगर  भगवान कृष्ण दुर्योधन का मेवा त्याग विदुर के घर शाक न खाया होता तो शायद वे योगीराज कृष्ण न कहे जाते ।जब निषाद राज का बेटा और चक्रवर्ती सम्राट के पुत्र राम ने एक ही गुरुकुल में एकसाथ शिक्षा दिक्षा ग्रहण की फिर ये कथन अप्रांसगिक है कि भारत में ऊंचनीच छुआ-छूत का भेदभाव था।

आदरणीय रमेश जी ने कहा कि भारत वर्ष में सामाजिक समरसता की अनुठी परम्परा रही है सभी मांगलिक कार्यक्रम बड़े छोटे सभी के योगदान के बगैर पूरे ही नहीं होते थे।

सामाजिक विषमता मुगलों की देन है जबतक भारत में मुगल नहीं आये थे तब तक सनातन संस्कृति में सभी को कार्य के अनुसार सभी का सम्मान था। सभी की उपयोगिता थी।

वरिष्ठ एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री भागवत पाण्डेय जी ने कहा कि समरसता से समाज का ही निर्माण नहीं समस्त राष्ट्र का स्वरूप खड़ा होता है,संघ के स्वयं सेवक और समाज के जागरूक प्रत्येक नागरिक को अपने व्यवहार से समाज में व्याप्त खाई को पाटने का काम करना चाहिए ।

कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना रखते हुए प्रान्त के समरसता संयोजक सुभाष चन्द्र शुक्ल ने कहा कि किसी भी विद्वान मनीषी महापुरुष के दिखाये हुए मार्ग पर चलने से पथ भ्रमित करने के लिए देश में समय-समय पर तमाम नकारात्मक शक्तियों ने काम किया यह बाबा साहेब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर की देन है कि उस काल खण्ड में हिन्दू समाज का एक बड़ा भाग इस्लाम के पाले में जाने से बच गया। डाक्टर अम्बेडकर एक सच्चे राष्ट्र आराधक थे।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  विभाग प्रचारक अजय नारायण, जिला प्रचारक अभय, विहिप के प्रान्तिय मंत्री नागेन्द्र कुवर, विभाग कार्यवाह आशीष, संपर्क प्रमुख वीरेन्द्र शुक्ल, जिला कार्यवाह श्री राम, सह जिला कार्यवाह नीरज, नगर कार्यवाह धर्मराज, मधुरेश,वायुनन्दन, रणजीत, बृजेश, राहुल, अभिनव, सुधांशु,हर्ष कशौधन, राजीव पाण्डेय, लल्ला यादव, महेंद्र, इन्द्र भुजा, संतराम, राजेन्द्र नाथ तिवारी, रामफेर भारती, ओम प्रकाश, अरविंद त्रिपाठी,गोपेश्वर त्रिपाठीजी,विधान चन्द्र जी, शिवपूजन जी,डा0 एस पी सिंह जी,डा0 राजेश कुमार मिश्र,अजय पाल, राजेन्द्र गौड़, श्याम बिहारी, अनिल यादव, वीरेन्द्र यादव, ओमप्रकाश ठाकुर, धीरज सरीन,वैभव, अभय, दिग्विजय, अनुपम,प्रदीप जायसवाल, अरुण भारती, भवानी प्रसाद,चन्द्र शेखर मुन्ना, रविन्द्र गौतम,राधेश्याम कमला पुरी, राजीव ,चौथे राम विश्वकर्मा, अजय पाल, आशुतोष मल्ल, मदन मोहन,राम केश,हरे श्याम, भानु त्रिपाठी , राकेश त्रिपाठी, गोविंद, शशांक, नन्द किशोर,जानकी प्रसाद, अयोध्या प्रसाद ,पवन कशौधन सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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