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मजदूरों को मिला कांग्रेस का साथ,कमिश्नर से हुई शिकायत

मजदूरों का करोड़ों बकाया, प्रशासन सीनाजोरी से निकाल रहा सुगर मिल के उपकरण

मजदूर हितों की अनदेखी हुई तो तूल पकड़ सकता है सुगर मिल का मामला




 बस्ती सुगर मिल के धरनारत कर्मचारियों की समस्या को लेकर कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ की अध्यक्षता में मण्डलायुक्त से मिला। बस्ती सुगर मिल 10 वर्षों से बंद है। किसानों के गन्ना मूल्य बकाये का भुगतान वाल्टरगंज सुगर मिल से कराया जा चुका है, किन्तु 160 से ज्यादा कर्मचारियों के वेतन, रिटेनर, बोनस, पी.एफ और गेच्युटी का करोड़ों रूपया अभी बकाया है।

इनका परिवार भुखमरी के कगार पर है। भुगतान की उम्मीद लेकर 10 वर्षों से कर्मचारी लगातार आन्दोलन कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कर्मचारियों के बकाये का भुगतान करने के बावजूद ही मिल का स्क्रैप बाहर ले जाया जाये, तब तक के लिये इस रोक लगाने की मांग की। आपको बता दें पूर्व में जिला प्रशासन और कर्मचारियों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में यह तय हुआ था कि दिसम्बर 2023 तक कर्मचारियों का एक एक पाई भुगतान करने के बाद ही मिल कटेगी और इसका स्क्रेप बाहर ले जाया जायेगा। किन्तु हैरानी की बात है प्रशासनिक अधिकारी पूर्व में हुये समझौते की अनदेखी कर खुद अपने सामने मिल के उपकरणों को ट्रकों में लदवाकर बाहर भेज रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कर्मचारी हितों पर कुठाराघात है। ऐसा लगता है कि बिना बकाया भुगतान किये मशीनों को काट कर बेंच दिया जायेगा। इतना ही नही मिल कटने का भी आदेश शासन ने नही लिया है और आदर्श आचार संहिता की आड़ में मिल कटवाई जा रही है। विरोध कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाने की धमकी दी जा रही है। मामला तूल तब पकड़ा जब कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल 10 अप्रैल को सुगर मिल पर पहुंचा, जो देखा गया हैरान करने वाला था। मिल के अंदर प्रशासन की 4 गाड़ियां खड़ी थी और उप जिलाधिकारी सदर शत्रुघ्न पाण्डेय स्वतः पक्षकार बनकर मिल के उपकरणों को वाहनों में अपनी देखरेख में लोड करवा रहे थे।

प्रतिनिधि मंडल ने उनसे इस संदर्भ में वार्ता करना चाहा लेकिन उन्होने प्रतिनिधि मंडल पर भी मुकदमे दर्ज करवाने की बात ही। बस्ती सुगर मिल का मामला बेहद गंभीर है और स्थानीय प्रशासन का रूख बेहद असंवेदनशील है। मजदूरों के हितों की अनदेखी कर जिस प्रकार सीनाजोरी कर मिल का स्क्रैप बाहर ले जाया जा रहा है यह काफी निन्दनीय है। कांग्रेस पार्टी ने मांग किया कि कर्मचारी हितों का ध्यान रखते हुये वेतन, रिटेनर, बोनस, पी.एफ. और  गेच्युटी के फाइनल सेटलमेंट के बाद ही मिल का स्क्रैप बाहर ले जाया जाये। जोर जबरदस्ती किया गया तो लोकतांत्रक तरीकों से कांग्रेस इस संघर्ष को आगे ले जायेगी। मण्डलायुक्त से मिलने वालों में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, मो. रफी खां, गंगा प्रसाद मिश्रा, सुरेन्द्र मिश्रा, अशोक श्रीवास्तव, आशुतोष सिंह आदि शामिल थे।

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