कन्नौज मे पूर्णिमा के दिन हुआ रावण दहन, जाने दशहरा के दिन क्यों नही होता है पुतला दहन
कन्नौज जिले में दशहरे को नहीं बल्कि शरद पूर्णिमा को रावण के पुतले का दहन किया जाता है। मान्यता है कि रावण को दशहरा के दिन तीर लगने से धराशाई हुआ था। लेकिन रावण की मृत्यु शरद पूर्णिमा के दिन हुई थी। इसी मान्यता के आधार पर कई सालों से यहां पर यह परम्परा चली आ रही है। शनिवार की रात ग्वाल मैदान में राम रावण युद्ध के मंचन के बाद पुतला दहन किया गया। इस दौरान दर्शकों ने आतिशबाजी का जमकर लुफ्त उठाया।
इत्रनगरी के ग्वाल मैदान में शनिवार् की रात 9 बजे शरद पूर्णिमा के दिन बुराई रूपी रावण के पुतले का दहन किया गया है। रामलीला मैदान में रावण के पुतला में आग लगते ही जय श्रीराम के नारे लगाने लगे। वहीं शरद पूर्णिमा के दिन किए जाने वाले रावण दहन के पीछे कई सालों से चली आ रही मान्यता है। रामलीला कमेटी के सदस्य सौरभ मिश्रा ने बताया कि भगवान राम ने दशहरा वाले दिन लंकापति रावण को बाण मारा गया था और वह युद्ध भूमि में मूर्छित होकर गिर पड़े थे। लेकिन रावण ने अपने प्राण शरद पूर्णिमा को त्यागे थे। इसी कारण मान्यता के आधार पर रावण के पुतले का दहन शरद पूर्णिमा को किया जाता है। इतना ही नहीं यह भी कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही आसमान से अमृत बरसता है। जिस कारण लोग खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे भी रखते हैं। दूसरे दिन परिवार के सदस्य खीर को खाते है। कई सालों से चली आ रही मान्यता को निभाते हुए रामलीला कमेटी रावण के पुतला दहन का आयोजन प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के दिन ही करती है। इसलिए रामलीला मैदान में रावण के पुतले का दहन देखने के लिए भारी भीड़ भी पहुंचती है।