श्री कृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद मामले में कल कोर्ट दे सकता है अपना फैसला
श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के दावे का है मामला
श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद मामले में वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के रिवीजन दावे पर पिछली तारीख पर कोर्ट में अधिक कार्य होने की बजह से 23 फरवरी की तारीख फैसले के लिए लगाई थी।जिसमें सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अभी तक अपना कोई पक्ष नहीं रखा है।
वादी और प्रतिवादी शाही ईदगाह कमेटी कोर्ट के सामने रख चुके हैं अपना अपना पक्ष ।रिवीजन दावे पर एडीजे -6 अभिषेक पांडे की अदालत में 3 तारीखों पर करीब 5 घण्टे हो चुकी है बहस । श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के दावे में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने 7 रूल 11 के तहत दावे की पोषणीय पर पहले सुनवाई के आदेश के दिए थे ।
जिसके खिलाफ जिला जज की अदालत में वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने विवादित स्थल की सर्वे के लिए रिवीजन दायर किया था ।जिला जज ने रिवीजन दावे को एडीजे -6 अभिषेक पांडे की अदालत में सुनवाई के लिए ट्रांसफर किया था ।रिवीजन दावे में विवादित स्थल की सर्वे पर प्राथमिकता से सुनवाई की मांग रखी थी , जिसमें बादी- प्रतिवादियों की बहस पिछली तारीख पर पूरी हो चुकी है ।कल एडीजे 6 की अदालत सिविल जज सीनियर डिवीजन के लिए यह आदेश करेगी कि पहले विवादित स्थल की सर्वे पर सुनवाई हो ,या दावे की पोषनीयता पर ।प्रतिवादी पक्ष शाही ईदगाह कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वफ बोर्ड 7 रूल 11 के तहत दावे की पोषणीय पर पहले सुनवाई की मांग कर रहे हैं ।वादी पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का कहना ज्ञान व्यापी की तरह यहां पर भी हिंदू स्थापित्य कला के सबूत मिलेंगे ,खुदाई में बहुत सारे साक्ष सामने आएंगे ,जो यह साबित करेंगे कि यह भूमि हमारे आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थल गर्भ ग्रह की है, और कई सारे सबूत जो शाही ईदगाह की दीवारों पर अंकित हैं उन्हें मुस्लिम पक्ष नष्ट करने में लगा है , इसीलिए जल्द से जल्द विवादित स्थल पर कोर्ट कमिशन जाना अति आवश्यक है, सबूत सबके सामने ना आएं, इसीलिए मुस्लिम पक्ष 7 रूल 11 का बहाना देकर केस को लटकाना भटका ना चाहता है।
आपको बता दें श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि को मुक्त कराने और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए कोर्ट में करीब एक दर्जन दावे दायर किए जा चुके हैं , जिसमें से सबसे पहले कोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने वाला दावा ,वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का है।