उर्मिला एजुकेशनल एकेडमी, बस्ती में बाल दिवस पर उमंग-उत्साह के साथ कार्यक्रम सम्पन्न
विद्यालय में बच्चों की फूड स्टॉल्स ने सबका मन जीता
आज उर्मिला एजुकेशनल एकेडमी में बाल दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही विद्यालय परिसर बच्चों की चहल-पहल और उत्साह से भरा हुआ था। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय प्रांगण में आयोजित सामूहिक **प्रार्थना** के साथ हुई, जिसमें छात्रों ने अनुशासन और एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रार्थना के माध्यम से बच्चों ने शांति, सद्भाव और निरंतर प्रगति की कामना की।
प्रार्थना के उपरांत विद्यालय के विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने मिलकर **फूड स्टॉल्स का शानदार आयोजन** किया। यह आयोजन दिन का मुख्य आकर्षण बन गया। बच्चों ने अपनी रचनात्मकता और उत्साह का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए घर पर तैयार किए गए पौष्टिक व स्वादिष्ट व्यंजन विद्यालय में प्रदर्शित किए।
फूड स्टॉल्स में बच्चों द्वारा लाए गए व्यंजनों में—
* हेल्दी स्नैक्स
* घर के बने पारंपरिक व्यंजन
* मीठे पकवान
* कुछ रचनात्मक व नए प्रकार के व्यंजन
जैसे विविध आइटम शामिल थे। हर स्टॉल पर बच्चों की सजावट, प्रस्तुति और आत्मविश्वास देखने लायक था। स्टॉल्स को देखकर अभिभावकों, शिक्षकों व आगंतुकों ने बच्चों के उत्साह और मेहनत की खुलकर प्रशंसा की।
यह आयोजन न सिर्फ बच्चों के लिए मनोरंजन का स्रोत रहा, बल्कि इससे उन्होंने *टीमवर्क, प्रबंधन, स्वच्छता और जिम्मेदार व्यवहार* जैसे व्यावहारिक कौशल भी सीखे। कई बच्चों ने अपने व्यंजनों के बारे में बताते हुए अपनी पाक-कला और ज्ञान का आत्मविश्वास से परिचय कराया।
कार्यक्रम में छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए भी विशेष व्यवस्थाएँ की गई थीं। विद्यालय परिसर में—
*जम्पिंग झूला*
*मिकी माउस जम्पिंग*
*बाउंसी कैसल*
*मज़ेदार मिनी राइड्स*
जैसे आकर्षक खेल और मनोरंजन सुविधाएँ लगाई गई थीं।
इन मनोरंजक गतिविधियों ने छोटे बच्चों के चेहरे पर खुशियाँ बिखेर दीं और पूरा वातावरण हँसी-खुशी से भर गया। बच्चों ने इन आकर्षक झूलों का भरपूर आनंद लिया, जिससे कार्यक्रम और भी रंगीन व यादगार बन गया।
कार्यक्रम के दौरान *डा० राजन शुक्ला* ने सभी फूड स्टॉल्स का बारीकी से निरीक्षण किया तथा बच्चों से उनके व्यंजनों, तैयारी और प्रस्तुति से जुड़े प्रश्न पूछे। उन्होंने छात्रों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और मेहनत की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
उन्होंने अपने संदेश में कहा—
“बच्चों द्वारा लगाया गया यह फूड स्टॉल आयोजन उनकी रचनात्मक क्षमता, स्वावलंबन और सीखने की लगन को दर्शाता है। इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों के व्यक्तित्व विकास में अत्यंत सहायक होती हैं। विद्यालय द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय है।”
विद्यालय के *प्रबन्ध निदेशक* श्री विनय शुक्ल ने भी इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए कहा—
“बाल दिवस बच्चों के सपनों, उनकी हिम्मत और उज्ज्वल भविष्य को समर्पित दिन है। फूड स्टॉल जैसे कार्यक्रम बच्चों में *नेतृत्व कौशल, टीमवर्क, जिम्मेदारी और व्यावहारिक ज्ञान* विकसित करते हैं। हमें गर्व है कि हमारे विद्यार्थी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।”
उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों का धन्यवाद भी व्यक्त किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शशि प्रभा त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि “फूड स्टॉल जैसे आयोजन बच्चों को वास्तविक जीवन के कौशल सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे उनमें *नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और रचनात्मक सोच* विकसित होती है।”
बाल दिवस पर उन्होंने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ भी दीं।
इस पूरे आयोजन में विद्यालय के **शिक्षकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई**।
शिक्षकों ने बच्चों को व्यंजन चयन, स्टॉल की सजावट, स्वच्छता, प्रस्तुति और प्रबंधन से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
शिक्षकों के सहयोग व निर्देशन से ही बच्चे इस गतिविधि में आत्मविश्वास के साथ भाग ले सके और अपनी प्रतिभा को प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर पाए।
शिक्षकों की सक्रिय निगरानी, समन्वय और प्रेरणा इस कार्यक्रम की सफलता का बड़ा कारण रही।
अंत में सभी बच्चों को **चॉकलेट और उपहार** प्रदान कर बाल दिवस की शुभकामनाएँ दी गईं। कार्यक्रम पूरे दिन उत्साह, मुस्कुराहट और बच्चों की खुशियों से भरा रहा।
विद्यालय परिसर में आज का दिन सचमुच बाल दिवस की भावनाओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित करता हुआ दिखाई दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बसन्त गुप्ता, राकेश पाण्डेय, संतोष सिंह, श्रवण चौधरी, अभिनव प्रकाश पाण्डेय, मनोज मिश्रा, राजेश पाण्डेय, सुधांशु सर, अमन मिश्रा, शैलेन्द्र तिवारी, दिव्यांश श्रीवास्तव, श्यामा, सुजाता, पूनम, अर्चना, शिप्रा, नम्रता, दीपाली, प्रतिमा के., खुशबू, ममता, निष्ठा मणि, आंचल सिंह, श्रीमती रंजना यादव, मधु कन्नौजिया, सतनाम कौर, अंजू मिश्रा, मधुप्रिया मिश्रा, एवं मिनाक्षी मिश्रा का विशेष योगदान रहा।
