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बस्ती में कुछ इस तरह मनाई गई गीता जयंती

 सनातन धर्म संस्था-बस्ती श्रीमद्भगवत गीता जयन्ती विधि विधान से मनाई गई।



राजेश्वरी मिश्रा प्राकृतिक कृषि फार्म दुबखरा पर मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के अवसर पर श्रीमद्भगवत गीता विचार संचार उत्सव का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर श्रीमद्भगवत गीता के 18 अध्याय का पारायण हुआ ततपश्चात गीता विचार संचार उत्सव का प्रारम्भ हुआ जिसमें आये हुए सभी अतिथियों व श्रोताओं को गीता जी की पुस्तक व अंगवस्त्र भेंट किये गए।
गीता जी के पूजन अर्चन से शुरू हुई गीता विचार उत्सव को सम्बोधित करते हुये भुवनेश शास्त्री जी ने कहा श्रीमद् भागवत गीता साक्षात प्रभु की वाणी है मनुष्य को मनुष्य बनने की समस्त शिक्षा इसमें सन्निहित है। भागवत  कथा व्यास अनिरुद्ध शुक्ला ने समस्त जनमानत से गीता स्वाध्याय हेतु आग्रह किया। कटरा कुटीर अयोध्या धाम से पधारे संत स्वामी चिन्मयानंद जी ने गीता को परिभाषित करते हुए बताया कि आज मनुष्य के आहार बिहार परिधान सब दूषित हो चुके हैं हमें निष्काम भाव से अनुकरणीय कृत्यों को करते हुए भावी पीढ़ी के अंदर संस्कार का निर्माण यही हमारा उद्देश्य होना चाहिये। व्याकरण के मूर्धन्य विद्वान व सम्पूर्णानन्द संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य मुख्य वक्ता डॉ0 अम्बरीष मिश्र ने बताया गीता जीवन जीने की कुंजी है। सामान्यतया अवधारणा है कि गीता अर्थात विरक्ति जबकि आप किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हों आपको उत्तम मानव बनाने की शिक्षा ही देती है। उन्होंने बताया हमारा आहार विहार सात्विक होना चाहिए, प्रत्येक मानव को त्रिकाल संध्या, गायत्री जप अनिवार्य रूप से करना चाहिए। पुत्र ऐसा हो जो भाव से श्रद्धा और श्राद्ध करे और अपने पितरों को तारे। सनातन परंपरा में प्रत्येक ग्रंथ, साहित्य वो बोध कराते है कि आपके कृत्य आपके भविष्य का निर्माण करते हैं आप जिस व्यवहार की अपेक्षा दूसरों से करते हैं वही व्यवहार हमे दूसरों से करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन करते अखिलेश दुबे ने बताया सनातन धर्म संस्था का प्रयास है कि प्रत्येक सनातनियों को गीता का स्वाध्याय करना चाहिए संस्था इसके लिए कृत संकल्पित है जिससे मानव का निर्माण होगा और हमारा समाज समृद्ध होगा संस्था इसके लिए सतत कार्य कर रही है। कार्यक्रम के अंत में आए हुए सभी धर्म अनुरागियों का आभार व्यक्त करते कर्नल के सी मिश्रा ने कहा जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी अवश्य ही रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि आइए गीता जयंती पर संकल्प लें कि जन जन तक गीता के सदविचारों को पहुंचाने का कार्य करेंगे तभी आज के दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कर्नल मिथुन मिश्र, रंजीत मिश्र, राणा दिनेश प्रताप सिंह, एच पी मिश्र, अवध नारायण मिश्र, चंद्रसेन नायक, ओंकारनाथ मिश्र, अतुल चित्रगुप्त, प्रोफेसर डॉक्टर दिलीप अस्थाना, सूर्यनारायण मिश्र, गणेश मिश्र, कैलाश नाथ दुबे, भुनेश्वर नाथ पांडेय, मनीष सिंह
अंकुर यादव, सुशील मिश्र, अनुराग शुक्ल, पंकज त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित रहे।

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