संस्कृति के संरक्षण और संस्कार युक्त शिक्षा हेतु आवश्यक है; देव स्थलों के दर्शन : महंत हरिदर्शन स्वामी जी
अनुशासन में रहकर शिक्षा ग्रहण करने से जीवन में आता है परिवर्तन : देव प्रसाद दास।
विद्या मंदिर रामबाग में छात्र संसद का शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न।
सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग के छात्र संसद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह श्री स्वामी नारायण छपिया मंदिर गोंडा में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के मुख्य आयोजक महंत श्री देव प्रसाद दास जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में महंत श्री हरिदर्शन स्वामी जी तथा विद्या मंदिर रामबाग के प्रधानाचार्य श्री गोविंद सिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
श्री स्वामी नारायण भगवान के जन्म स्थली मंदिर के दर्शन पूजन के पश्चात मंदिर प्रांगण में ईश्वर के सम्मुख शपथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। छात्र संसद की उपयोगिता और हेतु बतलाते हुए छात्र संसद प्रमुख आशीष सिंह ने अतिथि परिचय और कार्यक्रम की प्रास्ताविकी रखी। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोविंद सिंह ने बताया कि छात्र संसद के माध्यम से छात्र समस्या का समाधान करें। लक्ष्य को निर्धारित करके अपने कार्य को पूरा करें। इससे छात्रों के अंदर नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। भविष्य में वह किसी भी क्षेत्र में रहें, इससे उनमें निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और लोगों को न्याय दिलाने के लिए तत्पर रहते हैं।
मुख्य अतिथि महंत श्री देव प्रसाद दास जी ने छात्र संसद के पदाधिकारियों को बैच लगाकर पदभार ग्रहण कराया और कहा कि विद्याधन सभी धनों में प्रमुख है। अनुशासन में रहकर शिक्षा ग्रहण करने से ही जीवन में परिवर्तन आता है। हमें अच्छा लगा कि विद्यालय और आप सभी अपनी भारतीय संस्कृति से जुड़कर संवर्धन कर रहे है।
विशिष्ट अतिथि स्वामी हरिदर्शन महराज ने श्री स्वामी नारायण मंदिर के इतिहास के विषय में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भगवान के जीवन के बारे में बताया कि घनश्याम पांडे या स्वामीनारायण या सहजानंद स्वामी हिन्दू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक थे। अप्रैल, 1781 को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कही जाने वाली अयोध्या के पास छपिया नाम के गांव में उनका जन्म हुआ था। उस दिन रामनवमी थी।
ज्ञात हो कि विगत दिवसों में छात्र संसद प्रमुख आचार्य आशीष सिंह के नेतृत्व में विद्यालय के छात्र संसद का गठन हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री पद हेतु आवेदन मांगे गए थे, प्रधानमंत्री का चयन भाषण प्रतियोगिता एवं सभी सांसदों के मतों के आधार पर किया गया था। उक्त चुनाव में विजयी होकर भैया शाश्वत पाण्डेय (12B) प्रधानमंत्री बने। वरिष्ठ माध्यमिक प्रभारी विनोद सिंह एवं छात्र संसद प्रमुख आशीष सिंह के साथ प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर संसद में सम्मिलित विभिन्न पदों हेतु पदाधिकारियों का चयन किया, जिसमें समर्थ शुक्ला (11E) उपप्रधानमंत्री, देवा पाण्डेय (11A) सेनापति, कृपांशु मिश्र (11E) उपसेनापति और मुख्य न्यायाधीश विराज सिंह (10C) चुने गए। इसके अतिरिक्त कुल 19 विभागों के 44 मंत्री प्रधानमंत्री के आग्रह पर छात्र सांसदों में से चयनित कर मन्त्रिमण्डल का विस्तार किया गया था।
साथ ही प्रधानाचार्य ने मंदिर के मुख्य आयोजक सहित मंदिर के मुख्य पुजारी जी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आचार्य रणजीत सिंह, अरुण सिंह, अंकित कुमार गुप्ता और प्रदीप गुप्त की उपस्थिति रही।