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अखिलेश यादव ने 4 जून को बताया ऐतिहासिक, जानिये वजह

 15 अगस्त 1947 अगर ‘औपनिवेशिक राजनीति’ से आज़ादी का दिन था, तो 4 जून 2024 देश के लिए ‘साम्प्रदायिक राजनीति’ से आज़ादी का दिन रहा।



ये साम्प्रदायिक राजनीति के अंत और सामुदायिक राजनीति की शुरुआत है।

 ये नव आशावाद, नयी उम्मीद के युग की शुरुआत है।

 इसने तोड़नेवाली राजनीति को तोड़ दिया है, जोड़नेवाली राजनीति की जीत है। 

 ये PRO-CONSTITUTION वालों की जीत है। जो मानते हैं ‘संविधान ही संजीवनी है’ ये उनकी जीत है।

 संविधान-मंथन में संविधान रक्षकों की जीत है। 

 ये 90% शोषित, वंचित, पीड़ित मतलब PDA की जीत है। 

PDA सौहार्द का समीकरण है।

 PDA नये युग का काग़ज़ भी है और क़लम भी। 

 ⁠PDA ने लोकतंत्र का नया महाकाव्य लिख दिया है।

 ⁠इस चुनाव में ‘साम्प्रदायिक राजनीति’ की हमेशा के लिए हार हो गयी है।

‘ऊपर-से-नीचे’ की राजनीति का अंत हो गया है। अब नीचे से समाज की जो आवाज़ उठेगी, वही राजनीति का आधार बनेगी।

देश किसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से नहीं जनाकांक्षा से चलेगा मतलब अब ‘मनमर्ज़ी’ नहीं; ‘जनमर्ज़ी’ चलेगी। 

 इस चुनाव में धन-छल-बल की नकारात्मक राजनीति की शिकस्त हुई है।

इस चुनाव के बाद ‘सकारात्मक राजनीति’ का नया दौर शुरु होगा।

इस चुनाव के बाद किसी राज्य की अर्थव्यवस्था को किसी और राज्य के चंद लोगों के लाभ के लिए लूटने की स्वार्थी चालबाज़ी का ख़ात्मा हुआ है।

 इस चुनाव के बाद जनता के प्रति दायित्व का बोध बढ़ेगा।

 इस चुनाव ने ‘बेलगाम राजनीति’ की नाक में हमेशा के लिए नकेल डाल दी है। 

अभी बुनियाद तैयार हुई है, हम सबको मिलकर इमारत बनानी शुरु करनी है।

⁠जनाकांक्षा का प्रतीक ‘इंडिया गठबंधन’ जनसेवा के अपने संकल्प पर अडिग रहेगा, एकजुट रहेगा और संविधान, लोकतंत्र , आरक्षण, मान-सम्मान-स्वाभिमान बचाने तथा बेरोज़गारी, महँगाई, भ्रष्टाचार के कष्ट और संकट से जनता को मुक्त करने के अपने प्रयासों को निरंतर रखेगा। 

इस चुनाव ने साबित कर दिया है कि ‘मनमर्ज़ी’ नहीं, ‘जनमर्ज़ी’ सबसे बड़ी होती है।

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