सामूहिक हत्याकांड का खुलासा
यूपी के सीतापुर में पल्हापुर गांव में एक ही परिवार के 6 लोगों की सामूहिक हत्याकांड का पुलिस ने आज खुलासा करने का दावा किया है। जिसमें पुलिस का दावा है कि इस सामूहिक हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि मृतक अनुराग ठाकुर का छोटा भाई अजीत सिंह है और उसी ने पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया है। आज घटना का खुलासा करने आईजी तरुण गाबा सीतापुर पहुंचे और उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि अनुराग ठाकुर और उसके भाई अजीत सिंह के बीच कुछ पैसों और जमीन को लेकर विवाद के चलते ऐसा महसूस किया जा रहा था कि उसके भाई और भाभी द्वारा उसे प्रताड़ित महसूस कर रहा था और उससे लग रहा था कि उसके भाई और भाभी उसके साथ बेईमानी कर रहे हैं। आईजी तरुण गाबा ने बताया कि 24 लाख का केसीसी लोन था जिससे इसके भाई और भाभी ने पहले वादा किया था लोन चुकाने के लिए लेकिन बाद में भाई और भाभी के द्वारा लोन चुकाने से इनकार कर दिया गया। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच विवाद हुआ था जिसके बाद अजीत सिंह ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया। एक सवाल के जवाब में आईजी ने दावे के साथ कहा कि पहले अजीत सिंह ने अपने आप को चश्मदीद गवाह बताते हुए पूरे घटनाक्रम को अपने सामने होना बताया था लेकिन जब पूरे मामले की गहनता से छानबीन की गई और जो साक्ष्य घटनास्थल से मिले थे। उससे यह स्पष्ट हुआ कि अभियुक्त अजीत द्वारा ही इस पूरे सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया है। अजीत ने ही पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार अंजाम दिया। जिसमें अजीत ने सबसे पहले अपनी भाभी की हत्या की और उसके बाद नीचे आकर मां और भाई पर वार किया एक-एक करके बाकी बच्चों को भी इस घटना का अंजाम बनाया। आईजी तरुण गाबा ने दावा किया कि अभियुक्त अजीत सिंह के पास से 315 बोर का तमंचा आठ जिंदा व पांच खोखा कारतूस के साथ एक हथोड़ा बरामद किया गया है। बताते चले कि इस पूरे सामूहिक हत्याकांड को लेकर पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा के द्वारा घटना के तुरंत बाद एक बयान जारी किया गया था जिसमें एसपी द्वारा मृतक अनुराग ठाकुर को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया गया था पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरा मामला पुलिस के उल्टे ही पड़ गया था।
आईजी तरुण गाबा के द्वारा पाल्हापुर में हुए सामूहिक हत्याकांड खुलासे को लेकर किए गए दावों को अगर देखें तो तमाम ऐसे सवालिया निशान सामने आ रहे हैं जो पुलिस के इस खुलासे को हवा हवाई साबित कर रहे हैं। जैसे की क्या एक आदमी एक साथ 6 लोगों की हत्या कर सकता है। जबकि आरोपी बाईपास सर्जरी करवा चुका है। हत्याकांड को जिस तरह से अंजाम दिया गया है उसे साफ जाहिर होता है की गोली मारने का तरीका शार्प शूटर से कम नहीं है। पुलिस द्वारा घटनास्थल का बैलेस्टिक जांच के लिए टीम को ना बुलाना। वही पुलिस यह भी नहीं बता सकी की अजीत के पास असलहा और कारतूस कहां से आया। क्या कोई एक व्यक्ति दो बच्चों को गोद में उठाकर एक साथ दो मंजिला छत से नीचे फेंक सकता है। जबकि पीएम रिपोर्ट में मृतक अरना और अद्विक के पैर टूटे पाए गए। पुलिस की अगर माने तो पुलिस तीनों बच्चों को छत से नीचे फेंका जाना स्वीकार कर रही है जो कि अपने आप में एक बड़ा सवालिया निशान है। वही पीएम रिपोर्ट में मृतक अनुराग ठाकुर की बड़ी बेटी आश्वी को गोली और हथौड़े से प्रहार पर करके हत्या किया जाना बताया गया है। कुल मिलाकर ऐसे तमाम अनसुलझे सवाल है जो कि इस पुलिस के खुलासे को हवा हवाई साबित कर रहे हैं। बताते चलें बीती 10/11 की रात को पाल्हापुर गांव में अनुराग ठाकुर के द्वारा अपनी मां पत्नी और तीन मासूम बच्चों की हत्या करने के बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या किए जाने की घटना सामने आई थी।