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डॉक्टर वी के वर्मा को मिला सम्मान

 साहित्यिक योगदान के लिये डा. वी.के. वर्मा को तीन पुरस्कार




 प्रसिद्ध समाजसेवी, वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डॉ. वी.क.े वर्मा को साहित्यिक योगदान के लिये अन्तर्राष्ट्रीय गौरवांजलि ट्रस्ट  भूटान द्वारा ‘साहित्य गौरव’, और सावित्री देवी साहित्यिक संस्थान लखनऊ द्वारा ‘राष्ट्रीय साहित्य रत्नाकर सम्मान’ और साहित्यिक संस्था शव्द सुमन द्वारा  ‘ शव्द शिल्पी’ सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. वी.के. वर्मा तीन साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किये जाने पर कलेक्ट्रेट परिसर में साहित्यकारों, कवियोें ने फूल माला और प्रमाण-पत्र देकर उनका अभिनन्दन किया गया।

वरिष्ठ कवि साहित्य भूषण डॉ. सतीश आर्य ने  कहा कि कोरोना की विकट त्रासदी को एक चिकित्सक के रूप में निकट से देखना और उसे कविता में लिपिबद्ध करते जाना साहस का काम है। डा. वर्मा का रंचना संसार जन केन्द्रित होने के साथ ही विविधता लिये हुये है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग ने कहा कि कोरोना की त्रासदी का दंश युगों तक रहेगा। इस बीच डा. वर्मा एक चिकित्सक और कवि धर्म दोनों का निर्वहन कर रहे थे। कहा कि उनकी प्रमुख कृतियों में ‘भाव मंथन, भावाभिव्यक्ति’ ‘सोच’ के साथ ही कहानी संग्रह पाठकों में विशेष स्थान बना चुकी है। वर्तमान में तथागत पर केन्द्रित महाकाव्य प्रकाशन प्रक्रिया में है।
सम्मानित किये जाने पर डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि पुरस्कारों से और वेहतर कार्य करने की ताकत मिलती है। चिकित्सकीय सेवा से जो कुछ  पल बचते हैं वे साहित्य को समर्पित है। लेखन कार्य निरन्तर जारी है। पर्यावरण पर केन्द्रित एक काव्य संकलन शीघ्र ही पाठकों के समक्ष होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि  डा. वर्मा ने जिस प्रकार से अपने कृतियों के द्वारा अलख जगा रहे हैं वह सराहनीय है। इस अवसर पर पं. चन्द्रबली मिश्र, बटुकनाथ शुक्ल, बी.के. मिश्रा, जगदम्बा प्रसाद भावुक, पेशकार मिश्र, डा. अफजल हुसेन अफजल, प्रदीप श्रीवास्तव,दीन बंधु उपाध्याय, दीपक सिंह प्रेमी, राजेन्द्र  सिंह ‘राही’ , दीनानाथ,  प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सामईन फारूकर आदि मौजूद रहे।

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