अतीक के करीबी गैंगस्टर मासूक को इलाहाबाद हाई कोर्ट से झटका
कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने से इंकार किया
सजा के खिलाफ अपील सुनवाई के लिए नियमानुसार पेश करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशांबी जिले के एक ग्राम प्रधान मासूक उद्दीन,असलूव व शाहेजमां की गैंगस्टर एक्ट के तहत पूरा मुफ्ती थाने में दर्ज आपराधिक केस में जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है।और सजा के खिलाफ अपील की पेपरबुक तैयार कर नियमानुसार कोर्ट में सुनवाई हेतु पेश करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दिया है।
जिला एवं सत्र अदालत कौशांबी ने18जनवरी 24को गैंगस्टर आरोपियों को पांच साल की कैद व 25हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई है।
अपील में अर्जी दाखिल कर सजा को निलंबित करने तथा जमानत पर रिहा करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।
इनके खिलाफ 9जून 9को गैंग चार्ट बनाया गया है। पहले दो आरोपितों पर कौशांबी व प्रयागराज में चार केस व तीसरे आरोपित पर दो केस दर्ज है।मासूक गैंग लीडर हैं दो अन्य सदस्य हैं।
तर्क दिया गया कि अपराध के साक्ष्य पर सजा दी जा सकती है जबतक अपराध का दोषी न ठहरा दिया जाय ,केवल गैंग चार्ट होने से किसी को सजा नहीं दी जा सकती ।ऐसे में जमानत देने से इंकार नहीं किया जा सकता।वे 18जनवरी 24से जेल में हैं।अपील की शीघ्र सुनवाई की संभावना नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि यदि अपराध में दोषी ठहराए जाने के लिए साक्ष्य पर सजा होने की संभावना नहीं है और जमानत पर छूटने के बाद अपराध नहीं करेगा तो संतुष्ट होने पर कोर्ट जमानत दे सकती है।
आरोपियों का गैंग चार्ट है,मासूक को एक केस में उम्र कैद की सजा भी मिल चुकी है, जमानत पर हैं।
ऐसे में जमानत पाने के हकदार नहीं हैं।

