Type Here to Get Search Results !

राष्ट्रीय कार्यशाला में संस्कृतम विषय पर विद्वानों ने रखी अपनी बात

 


हीरालाल रामनिवास स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को संस्कृत विभाग में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित भारतीय भाषा समिति द्वारा अनुदानित "सरल मानक संस्कृतम" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके साथ ही इस कार्यशाला में सरल मानक संस्कृत विषय पर एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसमें मानव जीवन के सभी आयामों को सरल संस्कृत भाषा में दर्शाया गया है। यह कार्यशाला चार सत्रों में सम्पन्न हुई।

प्रथम उद्घाटन सत्र में मुख्यअतिथि एवं मुख्यवक्ता के रूप में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर, बिहार से आए प्रो श्रीप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि भारत एवं भारतीय संस्कृति की पहचान संस्कृत भाषा से ही है। भारतीय संस्कृति को बिना संस्कृत भाषा के नहीं समझा जा सकता। आपने आगे कहा कि संस्कृत को उच्च शिक्षण संस्थाओं में विषय के रूप में अध्ययन जरूर किया जा रहा है परन्तु भाषा के रूप में इसकी संवृद्धि के लिए जो प्रयास होना चाहिए वो नहीं हो रहा है। आपने आगे कहा कि संस्कृत भाषा को व्यवहारिक धरातल पर उतार कर जन जन तक पहुंचने के लिए इसके सरल स्वरुप से लोगों को परिचित करने की आवश्यकता है।

उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ प्रकाश झा ने कहा कि संस्कृत आम जन की भाषा है हम अपने दैनिक जीवन में रोज संस्कृत के सैकड़ो शब्दों का प्रयोग करते हैं परन्तु हमारे मस्तिष्क में यह बैठा दिया गया है कि संस्कृत बहुत कठिन भाषा है। आज हमें यह भ्रान्ति दूर करने की आवश्यकता है। आपने आगे कहा कि संस्कृत आत्मकल्याण के साथ साथ लोक कल्याण का मार्ग प्रसस्त करती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषक महाविद्यालय गौर के पूर्व प्राचार्य डॉ अरविन्द प्रबोध मिश्र जी ने कहा कि संस्कृत संस्कार की भाषा है। यह व्यक्ति के विचारों की मलिनता को दूर करती है साथ ही उसमें सदगुणो का विकास करती है। संस्कृत सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की भाषा है इसलिए आज विश्व के भिन्न भिन्न देशो के विद्वान संस्कृत सीखने के लिए उत्सुक हैं।

उद्घाटन सत्र में संचालन एवं अतिथियों का परिचय कार्यशाला के आयोजक सचिव प्रो विजय कृष्ण ओझा ने किया। आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो ब्रजेश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम के उपरांत अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ भारत भूषण द्विवेदी ने किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि अरुण कुमार पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि जोखन पाण्डेय रहे।

तृतीय सत्र के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो राजेश सिंह रहे। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो डी एन पाण्डेय ने किया।

चतुर्थ सत्र के मुख्य अतिथि गणेश धर द्विवेदी रहे। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ मनोज ओझा ने किया।

कार्यक्रम में राजीव नयन जी, प्रो प्रताप विजय कुमार,प्रो विजय राय, प्रो दिनेश गुप्ता, डॉ अमर सिंह गौतम, डॉ पूर्णश नारायण सिंह, डॉ अमित भारती, डॉ विजय कुमार मिश्र, नेहा सिंह, फ़खरे आलम,विद्या भूषण, मनोज वर्मा, दीप्शी सिंह, विजय बहादुर, डॉ दिनेश्वर शाही, डॉ अनुभव श्रीवास्तव, डॉ मनोज भारतीय, डॉ हेमेंद्र शंकर, डॉ आशा मिश्रा, डॉ राजकुमारी ओझा, डॉ अमित मिश्रा, डॉ अनुपम पति त्रिपाठी आदि शिक्षक एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागी एवं छात्र छात्राएँ उपस्थित रहे।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad