अदालत के फैसले के बाद छावनी में तब्दील हुआ लक्ष्याग्रह
5 फरवरी को बागपत की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए महाभारत कालीन टीले को लाक्षगृह मानते हुए हिन्दू पक्ष के हक में फैसला सुनाया था जिसमे टीले की 108 बीघा भूमि का स्वामित्व हिन्दू पक्ष को दिया था
ज्ञानवापी के बाद हिन्दू पक्ष को बरनावा के लक्ष्याग्रह के हक में फैसला आने के बाद जहां हिन्दू पक्ष में खुशी का माहौल है वहीं मुस्लिम पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करने का मन बना चुका है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हमने तमाम दस्तावेज़ अदालत में पेश कर दिए थे, दस्तावेजों में यहां बदरुदीन के अलावा दो अन्य मज़ारे भी थी और सूफी शेख बदरुदीन ने यही से ईमान का प्रचार प्रसार किया था।
क्या था लक्ष्याग्रह और बदरुदीन दरगाह का विवाद
दरअसल 1970 मे बरनावा के मुकिद खान ने मेरठ की सरधना तहसील में ब्रह्मचारी कृषदत्त को प्रतिवादी बनाते हुए एक वाद दर्ज कराया था। जिसमे कहा गया था कि बरनावा के टीले पर जहां सूफी शेख बदरुदीन की मजार और अन्य जगह में कब्रिस्तान है। जिनको कृष्णदत्त खुर्द बुर्द कर रहे है। यह मुकदमा दो दशक तक मेरठ की सरधना तहसील में चला उसके बाद बागपत जिले के गठन के बाद ये वाद बागपत स्थानांतरित हो गया। यहाँ भी गवाही और साक्ष्यों का दौर चला। इस मुकदमे में 208 तारीखें लगी
फैसला आने के बाद प्रशासन ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लक्ष्याग्रह पर भारी फोर्स तैनात कर दी । ओर अधिकारी पल पल की जानकारी ले रहे है।