झांसी के विश्वविद्यालय पुलिस चौकी के मलखाने से गुम हुई बंदूक, 11 दरोगा और 5 इंस्पेक्टर पर लटकी विभागीय गाज!
झांसी में पुलिस की नाक के नीचे से गायब हुई बंदूक और पूरे महकमे में मच गया हड़कंप! 8 साल पुरानी अमानत बनी अब गले की फांस, 11 दरोगा और 5 थानेदार कटघरे में! क्या बंदूक गायब हुई या गायब कर दी गई? चलिए आपको दिखाते हैं इस हथियार से उठे भूचाल की पूरी कहानी…
झांसी जनपद के थाना नवाबाद अंतर्गत विश्वविद्यालय पुलिस चौकी से 2017 में जमा हुई रिटायर्ड सूबेदार देवेंद्र सिंह राठौर की लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक DBBL-94 अब पुलिस के पास नहीं है! 2025 में बंदूक मांगने पहुंचे सूबेदार को जवाब मिला – ‘बंदूक गायब है!’ पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अमानत में खयानत की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन जवाब कौन देगा?”
अब जिनके सिर पर गाज लटक रही है, वो हैं चौकी इंचार्ज रह चुके – परमेंद्र सिंह, अनुराग अवस्थी, अनुज कुमार, अजीत शर्मा, भगत सिंह, सुबोध सिंह, चंदन पांडे, हिमांशु श्रीवास्तव, संदीप तोमर, राजेश सिंह और अश्वनी दीक्षित। साथ ही नवाबाद थाने के प्रभारी रह चुके – विजय पांडे, सुधाकर मिश्रा, तुलसीराम पांडे, शैलेन्द्र सिंह और जितेन्द्र सिंह भी जांच के घेरे में हैं।
सूत्र बताते हैं कि चौकी में तैनात एक पुलिसकर्मी की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। मामले की जांच खुद थाना प्रभारी संतोष अवस्थी की निगरानी में हो रही है।
अब देखना ये है कि बंदूक की गुमशुदगी का असली गुनहगार कौन निकलता है – लापरवाही, या कोई भीतरघात?