बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री के रूप में मनचाहा वर पाने की इच्छा रखने वाली एमबीबीएस की छात्रा इस कलयुगी में कर रही बड़ा तप, गंगोत्री से बागेश्वरधाम गंगा कलश लेकर निकली शिवरंजनी महोबा पहुंची
सनातन धर्म में तप और तपस्या से मनचाहा वर पाने का उल्लेख धर्म शास्त्रों में भी मिलता है लेकिन इस कलयुग में भी गंगोत्री से बागेश्वर धाम सर पर गंगा कलश लेकर पैदल जा रही शिवरंजनी तिवारी पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दर्शन की लालसा रखती है। जिन्हें अपना प्राणनाथ मान चुकी शिवरंजनी इस भीषण गर्मी में तमाम दुश्वारियां के बीच महोबा पहुंची हैं। जहां से बागेश्वर धाम की दूरी मात्र 80 किलोमीटर ही रह जाती है। महोबा पहुंचते ही शिवरंजनी तिवारी का जगह-जगह भक्तों द्वारा स्वागत किया जा रहा है तो वहीं महिलाएं भी मंगल गीत गा कर उन्हें आशीर्वाद दे रही है। 16 जून को शिवरंजनी कलश यात्रा को लेकर बागेश्वर धाम पहुंचेगी । पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपना प्राणनाथ कहने वाली शिवरंजनी उनसे विवाह करने की इच्छा रखती है उन्होंने इस दौरान शायरी के अंदाज में कहा कि "जब तक बिका न था कोई पूछता न था, आपने ख़रीदकर मुझे अनमोल कर दिया"।
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से विवाह करने की इच्छा रखने वाली एमबीबीएस की छात्रा और कथावाचक शिवरंजनी तिवारी गंगोत्री से सर पर गंगाजल का कलश लेकर पैदल ही मध्य प्रदेश के चर्चित बागेश्वर धाम जा रही हैं।तकरीबन 1150 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए इस भीषण गर्मी में शिवरंजनी अपने पिता और भाई के साथ बुंदेलखंड के महोबा पहुंची हैं। जहां पर जगह-जगह भक्तों द्वारा उनका स्वागत किया जा रहा है। एक दिन अपने भक्त के घर में रुककर शिवरंजनी फिर से 48 डिग्री तापमान में पैदल ही अपने प्राणनाथ के दर्शन के लिए चल पड़ी है। गंगा कलश की पूजा विधि विधान से करने के बाद शिवरंजनी तिवारी ने बागेश्वर धाम सरकार की जय के साथ-साथ पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जय बोलते हुए अपनी यात्रा के लिए निकल पड़ी है।जहां-जहां वह पहुंच रही है वहां वहां महिलाओं और भक्तों की भीड़ इकट्ठा हो जाती है और मंगल गीतों के साथ अपार शुभकामनाएं महिलाएं शिवरंजीनी दो दें रही हैं। शिवरजनी की मंशा पंडित धीरेन्द्र शास्त्री से विवाह करने की है और वह खुद उन्हें अपना प्राणनाथ बताती है। सनातन धर्म में अपना मनचाहा वर पाने के लिए तपस्या का वर्णन भी धर्म शास्त्रों में मौजूद है ऐसे में इस कलयुग की भीषण गर्मी मेंशिवरंजनी तिवारी की लंबी यात्रा को किसी तपस्या से कम आंकना गलत होगा।
मध्य प्रदेश की रहने वाली शिवरंजनी तिवारी अपने पिता और भाई के साथ इस पदयात्रा में निकली है। जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दर्शन और उनसे विवाह करने की मंशा है। उत्तराखंड के गंगोत्री से आरंभ हुई है यह यात्रा कई किलोमीटर का परेशानियों भरा सफर तय कर शिवरंजनी बुंदेलखंड के महोबा में हैं। जहां से वह अब बागेश्वर धाम के लिए पैदल प्रस्थान कर रही है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम आते ही उनके चेहरे पर मासूम सी लालसा और मुस्कान दिखाई पड़ती है। एमबीबीएस की छात्रा पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से इस कदर लगाव रखती है कि पैदल ही अपने प्राणनाथ से मिलने के लिए चल पड़ी है। उन्होंने संदेश दिया कि सभी लोग बालाजी सरकार बागेश्वर धाम से जुड़े। एक शेर के माध्यम से उन्होंने कहा कि "जब तक बिका ना था तो कोई पूछता न था.. आपने खरीद कर मुझे अनमोल कर दिया" क्योंकि आज के 10 दिन पूर्व शिवरंजनी को कोई नहीं जानता था लेकिन जब से बालाजी सरकार बागेश्वर धाम के चरणों से जुड़ी हूं तो आज मुझे घर-घर पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की वह इसलिए जय बोलती हैं क्योंकि उन्हीं की कृपा है कि वह पैदल उनसे मिलने जा रही हैं वह उनके प्राणनाथ हैं और उनसे मिलने की लालसा उन्हें गंगोत्री से बागेश्वर धाम खींच कर ला रही है।